उत्तराखंड चुनाव से पहले सर्वे ने बढ़ाई सियासी हलचल, भाजपा को 47 सीटों का अनुमान
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव से पहले सामने आ रहे अलग-अलग ओपिनियन पोल ने प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। ताजा न्यूज लीडर-मैट्रिज ओपिनियन पोल में भाजपा को 70 सदस्यीय विधानसभा में 47 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं कांग्रेस के खाते में 22 और बसपा को एक सीट मिलने का अनुमान है।
उत्तराखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में सर्वे के आंकड़े भाजपा को बहुमत के आंकड़े से काफी आगे दिखा रहे हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। यदि मौजूदा सर्वे के अनुमान चुनाव परिणामों में बदलते हैं, तो पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
लगातार सामने आ रहे सर्वे
पिछले कुछ समय में उत्तराखंड को लेकर सामने आए विभिन्न सर्वेक्षणों में भाजपा की स्थिति कांग्रेस से बेहतर बताई गई है। इसी महीने टाइम्स नाउ भारत के एक सर्वे में भाजपा को 54 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था।
इससे पहले अगस्त 2026 में इंडिया टुडे-सीवोटर के सर्वे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री पद के लिए 28.2 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे पसंदीदा चेहरा बताया गया था। इसी सर्वे में भाजपा की वोटिंग इंटेंशन भी कांग्रेस से अधिक बताई गई थी।
हालांकि, ओपिनियन पोल चुनाव से पहले मतदाताओं की राय का अनुमान होते हैं और वास्तविक चुनाव परिणाम अलग हो सकते हैं।
विकास और सांस्कृतिक मुद्दे बने सरकार के प्रमुख एजेंडे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका प्रदेश की राजनीति पर प्रभाव पड़ा है। समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण और भू-कानून से जुड़े कदम सरकार की प्रमुख पहलों में शामिल रहे हैं।
इसके साथ ही सरकार ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़े विषयों को भी अपने राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता दी है। चारधाम और मानसखंड क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं, सड़क एवं कनेक्टिविटी सुधार तथा पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है।
एंटी इनकंबेंसी बनाम सरकार के कामकाज का मुद्दा
विपक्ष लगातार सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, सामने आ रहे सर्वेक्षणों में भाजपा को मिल रही बढ़त के कारण सत्ता पक्ष सरकार के कामकाज और उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना रहेगा, जबकि अन्य दल भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में चुनावी माहौल आगे बढ़ने के साथ सरकार के कामकाज, मुख्यमंत्री के नेतृत्व, विकास योजनाओं और उत्तराखंड की पहचान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के महत्वपूर्ण विषय बने रह सकते हैं।
